Nrega Latest News Update 2026 भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 2026 का वर्ष इस ऐतिहासिक योजना के लिए डिजिटल परिवर्तन, बढ़े हुए वित्तीय आवंटन और नई रणनीतिक दिशाओं का साक्षी बन रहा है। सरकार की ‘विकसित भारत’ की दृष्टि के तहत, नरेगा को अब न केवल रोजगार देने वाली योजना, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह लेख आपको Nrega Latest News Update 2026 अपडेट के सभी पहलुओं—नए नियमों, मनरेगा वेज रेट 2026, तकनीकी सुधारों और भविष्य की योजनाओं के बारे में समग्र जानकारी देगा।
Nrega Latest News Update 2026?
केंद्रीय बजट 2025-26 में, नरेगा के लिए रु. 86,000 करोड़ का आवंटन किया गया है। यह पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्शाता है और सरकार के ग्रामीण रोजगार एवं बुनियादी ढांचे पर जोर को रेखांकित करता है। यह बढ़ा हुआ बजट निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए है:
- मजदूरी भुगतान में तेजी: ताकि श्रमिकों को उनकी मजदूरी समय पर मिल सके।
- सामग्री लागत का प्रबंधन: निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बढ़ती कीमतों को पूरा करना।
- नई परिसंपत्तियों का सृजन: जल संरक्षण, कृषि सहायक बुनियादी ढांचे और ग्रामीण सड़कों जैसे टिकाऊ कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना।
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Nrega मजदूरी दर 2026: राज्यवार नवीनतम दरें
हर साल की तरह, 2026 में भी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नरेगा मजदूरी दरें (Nrega Latest News Update 2026) संशोधित की गई हैं। केंद्र सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-ग्रामीण (CPI-R) के आधार पर इन दरों में बढ़ोतरी की है। कुछ राज्यों की संशोधित दरें (प्रतिदिन) इस प्रकार हैं:
- हरियाणा & केरल: रु. 374 (सबसे ऊंची दर)
- महाराष्ट्र & गोवा: रु. 357
- राजस्थान: रु. 255
- उत्तर प्रदेश & बिहार: रु. 237
- झारखंड & मध्य प्रदेश: रु. 243
श्रमिकों को सलाह है कि वे मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट (https://nrega.nic.in) पर जाकर अपने राज्य की अद्यतन दरों की पुष्टि करें। मनरेगा वेज कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपने काम के दिनों के हिसाब से कुल मजदूरी का अनुमान लगा सकते हैं।
NREGA Digital Initiative 2026
2026 में, नरेगा का डिजिटलीकरण एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार कम करना है।
- राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग ऐप (Nrega Latest News Update 2026): अब अधिकांश कार्यस्थलों पर स्थापना के समय और श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए सक्रिय रूप से इस ऐप का उपयोग किया जा रहा है। इससे फर्जी मजदूरों की संख्या पर अंकुश लगाने में मदद मिली है।
- आधार-सीड मजदूरी भुगतान: लगभग 99% से अधिक मजदूरी भुगतान सीधे श्रमिकों के आधार-सीड बैंक खातों (Aadhaar Seeded Bank Account) में किए जा रहे हैं, जिससे देरी और बिचौलियों की संभावना कम हुई है।
- ई-मस्टर रोल (e-Muster Roll): अब मस्टर रोल ऑनलाइन अपलोड और रियल-टाइम ट्रैक किए जा सकते हैं, जिससे रिकॉर्ड में हेराफेरी की गुंजाइश कम हुई है।
New Schemes under NREGA 2026
नरेगा के दायरे को विस्तार देते हुए, Nrega Latest News Update 2026 में इसे अन्य कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकृत किया जा रहा है:
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा: जैविक खेती और PM प्रणाम योजना के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। नरेगा श्रमिकों का उपयोग गड्ढे खोदने, वर्मी-कम्पोस्ट यूनिट बनाने और जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए किया जा रहा है।
- आवास योजना से समन्वय: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों को नरेगा के तहत काम करने की प्राथमिकता दी जा सकती है, ताकि वे अपने घरों के निर्माण में सहायता प्राप्त कर सकें और अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
- वाटरशेड विकास पर जोर: सूखे और जल संकट से निपटने के लिए, नरेगा कार्यों में चेक डैम, फार्म पॉन्ड, और नाली-नालों का निर्माण प्रमुखता से शामिल है।
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NREGA Grievance Redressal 2026
शिकायतों के समाधान के लिए तंत्र और मजबूत किए गए हैं:
- ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: श्रमिक मनरेगा सेवा पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसका समाधान निर्धारित समय-सीमा में किया जाना अनिवार्य है।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): ग्राम सभाओं द्वारा सामाजिक अंकेक्षण को और मजबूत बनाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुँचे।
भविष्य की राह: चुनौतियाँ और अवसर
हालाँकि डिजिटल सुधार सराहनीय हैं, लेकिन नरेगा 2026 में कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं:
- मजदूरी भुगतान में देरी: कई राज्यों में अभी भी मजदूरी के भुगतान में 15 दिनों की समय सीमा का पालन नहीं हो पाता।
- कार्यों की गुणवत्ता: टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
- मांग और आपूर्ति का अंतर: कुछ क्षेत्रों में, काम की मांग अभी भी उपलब्ध धन से अधिक है।
लेकिन, सरकार का फोकस NREGA और कौशल विकास को जोड़ने पर है, ताकि श्रमिकों को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। मनरेगा लेटेस्ट न्यूज़ के अनुसार, आने वाले समय में हर श्रमिक को बुनियादी डिजिटल साक्षरता प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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Nrega Latest News Update 2026: (FAQ)
Nrega 2026 में पंजीकरण कैसे कराएं? क्या यह ऑनलाइन हो सकता है?
- नारेगा जॉब कार्ड स्टेटस ऑनलाइन कैसे देखें: इस कार https://web.umang.gov.in/ पर जाएँ.
- ऑफिसियल पोर्टल पर जाकर यह रजिस्टर करना है, फिर Mobile OTP से.
- उमंग पोर्टल ओपन हो जाते हैं. इस काम के लिए, सर्च बॉक्स में
- आपको MGNREGA Options मिलेगा. .
- आपके सामने तीन विकल्प दिखाई द
क्या नरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार गारंटीड है? अगर 100 दिन काम नहीं मिलता तो क्या होगा?
मनरेगा (MGNREGA) के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी, लेकिन अब इसे ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-GRAMG) कानून द्वारा 100 की जगह 125 दिन कर दिया गया है, और अगर काम नहीं मिलता, तो आप बेरोजगारी भत्ते (Unemployment Allowance) के हकदार होते हैं, जिसका भुगतान राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.
रोजगार की गारंटी या अगर रोजगार न मिला त
- रोजगार की कानूनी गारंटी: इस संबंध में, 2005 का मनरेगा कानून (अब वीबी-ग्रामजी) ग्रामीण परिवारों को “100 (अब 125) दिनों की रोजगार गारंटी” के तहत गारंटीकृत वेतन रोजगार का कानूनी अधिकार देता है, बशर्ते परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम में संलग्न होने के इच्छुक हों।
- नौकरी की मांग का जॉब कार्ड: आपको अपना जॉब कार्ड भरना होगा और साथ ही नौकरी की मांग भी करनी होगी।
- रोजगार अवधि: आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- बेरोजगारी भत (Unemployment Bhat)
- 15 दिन के भीतर यदि कोई रोजगार नहीं मिलता, तभी आप Champagne अन्यायप
- आर्थिक देखभाल अनुदान दोनो तरह के मामले होते हैं – एक चौथाई और आधा. एक दिन की मजदूरी में
- राज्य की जिम्मेदारी: रोजगार प्रदान करना या भत्ता देना राज्य सरकारों की कानूनी जिम्मेदारी है.
- संक्षेप में: आपको 100 (अब 125) दिन का काम मिलना चाहिए, और न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा.
नरेगा मजदूरी का भुगतान कितने दिनों में मिलना चाहिए? देरी होने पर क्या करें?
जवाब: नियम के अनुसार, काम पूरा होने और मस्टर रोल जमा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान आपके बैंक खाते में हो जाना चाहिए। अगर भुगतान में देरी होती है, तो आप:
- अपने ग्राम रोजगार सहायक (Gram Rozgar Sahayak) से संपर्क करें।
- मनरेगा सेवा पोर्टल के शिकायत पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
- राज्य की हेल्पलाइन नंबर (जो आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है) पर फोन करें।
मनरेगा की शुरुआत कहाँ हुई थी?
व्ही. द्वारा 1991 में प्रस्तावित किया गया था। नरसिंह राव 2006 में, इसे संसद में अंत में स्वीकार किया गया और भारत के 625 जिलों में कार्यान्वित किया गया। इस पायलट अनुभव के आधार पर, एनआरईजीए को 1 अप्रैल, 2008 से भारत के सभी जिलों में शामिल करने के लिए तैयार किया गया था।
मनरेगा में 1 दिन की मजदूरी कितनी है 2026 में?
मनरेगा (MGNREGA) में 1 दिन की मजदूरी अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग होती है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी) के लिए केंद्रीय अधिसूचना के अनुसार ₹241 (अरुणाचल प्रदेश/नागालैंड) से ₹400 (हरियाणा) तक है, जिसमें उत्तर प्रदेश में ₹252 और मध्य प्रदेश में ₹261 दरें शामिल हैं, और यह वृद्धि जीवन यापन की लागत और क्षेत्रीय मुद्रास्फीति पर निर्भर करती है।
कुछ प्रमुख राज्यों की 2025-26 की दरें (लगभग):
- हरियाणा: ₹400
- उत्तर प्रदेश: ₹252
- मध्य प्रदेश: ₹261
- छत्तीसगढ़: ₹261
- बिहार: ₹255
- आंध्र प्रदेश: ₹370 (या ₹300 के करीब)
- महाराष्ट्र: ₹312
- दिल्ली: दरों में काफी वृद्धि, जो अन्य दक्षिणी राज्यों के बराबर है.
मनरेगा किस मंत्रालय ने लागू किया?
ग्रामीण विकास मंत्रालय ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए), 2005’ को लागू कर रहा है, जो प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ऐसे परिवार को कम से कम सौ दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करता है, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं।
मनरेगा में कितने घंटे काम होता है?
8 घंटे के बजाए 7 घंटे भी कर सकते हैं काम
मजदूरी के पैसे ना देने पर कौन सी धारा लगती है?
मजदूरी न देने पर मुख्य रूप से मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 (Payment of Wages Act, 1936) के तहत कार्रवाई होती है, खासकर इसकी धारा 15 के तहत शिकायत दर्ज की जाती है, और नियोक्ता के खिलाफ IPC की धारा 406 (विश्वासघात) या धारा 420 (धोखाधड़ी) भी लग सकती है, साथ ही चेक बाउंस होने पर NI Act की धारा 138 भी लागू होती है।
मजदूरी न मिलने पर कानूनी प्रावधान:
- मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936:
- यह अधिनियम समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करता है।
- मजदूरी न मिलने पर आप श्रम न्यायालय में धारा 15 के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
भारतीय दंड संहिता (IPC):
- धारा 406: अगर नियोक्ता जानबूझकर मजदूरी रोकता है, तो यह विश्वासघात का मामला बन सकता है, जिसमें जेल का प्रावधान है।
- धारा 420: यदि मजदूरी रोकने का इरादा धोखाधड़ी का है, तो यह धारा लगाई जा सकती है।
निष्कर्ष:
नरेगा 2026 के अपडेट स्पष्ट संकेत देते हैं कि यह योजना स्थिरता, पारदर्शिता और ग्रामीण समृद्धि की नई दिशा में अग्रसर है। बढ़ा हुआ बजट, संशोधित मजदूरी दरें, और डिजिटल हस्तक्षेप इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी को गंभीरता से ले रही है। श्रमिकों, अधिकारियों और स्थानीय निकायों की सामूहिक भागीदारी ही इस योजना को और अधिक प्रभावी बना सकती है।





